रुचि के स्थान

अग्रोहा धाम

ऐसी मान्यता है कि अग्रोहा किसी समय महाराजा अग्रसेन के राज्य की राजधानी था। यह नगर अत्यंत सुसमृद्ध और सम्पन्न था, लेकिन कालान्तर में यह विदेशी आक्रमणों से नष्ट हो गया, परन्तु आज अग्रोहा धाम एक धार्मिक एवं दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित हो चुका है। इसकी देखरेख एवं विकास अग्रोहा ट्रस्ट द्वारा की जाती है। अग्रोहा धाम में महाराजा अग्रसेन, कुलदेवी महालक्ष्मी, शक्ति शीला माता मंदिर, मां वैष्णो देवी मंदिर, वीणा वंदिनी सरस्वती मंदिर, हनुमान मंदिर, 90 फुट ऊंची भगवान मारूति की प्रतिमा, महाराजा अग्रसेन का प्राचीन मंदिर, भैरो बाबा का मंदिर, बाबा अमरनाथ की गुफा, हिमानी शिवलिंग, तिरूपति की भव्य मूर्ति एवं शक्ति सरोवर इत्यादि धार्मिक दर्शनीय स्थल हैं। यहां मनोरंजन के लिए नौका विहार एवं बच्चों के लिए आधुनिक झूले, बाल क्रिड़ा केन्द्र (अप्पूघर) भी हैं। यहां श्रद्धालु अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराने आते हैं। भाद्रपद अमावस्या को यहां बड़ा मेला लगता है। अग्रवाल समाज इसे अपना पांचवां धाम मानता है।

 

महत्त्वपूर्ण संस्थायें

लघु सचिवालय

हिसार-राजगढ़ मार्ग पर स्थित आधुनिक एवं भव्य चार मंजिला लघु-सचिवालय भवन का निर्माण सन् 1978 में किया गया और सन् 1979 से उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त उपायुक्त सहित जिले के प्रमुख विभाग यहां पर स्थापित हैं।

 

राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र

अश्वों के स्वास्थ्य एवं उत्पादन के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र की स्थापना सातवीं पंच वर्षीय योजना के अन्तर्गत हिसार में की गई। यह संस्थान अश्वों की प्रमुख बीमारियों के उपचार तथा जैविक विकास हेतु भी कार्य कर रहा है। इसके साथ राष्ट्रीय प्रमाणित सुविधाओं को उपलब्ध कराते हुए यह अश्वों के स्वास्थ्य निरीक्षण एवं निगरानी की विविध व्यवस्था भी कर रहा है।

 

केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान

इस संस्थान की स्थापना 1 फरवरी, 1985 को की गयी। यह संस्थान भैंसों के सुधार के लिए जीव कोशिका संरक्षण, सन्तुलित आहार, चारा क्षेत्र का विकास, प्रजनन योग्यताओं में बढ़ोतरी, दूध, मांस तथा खाल के स्वास्थ्य प्रबन्धन आदि पहलुओं पर अनुसंधान करता है।

 

उत्तरी प्रादेशिक फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं जांच संस्थान

यह केन्द्र सन् 1963 में एक प्रशिक्षण संस्थान के रूप में शुरू हुआ। उत्तरी क्षेत्रीय प्रशिक्षण सम्बन्धी आवश्यकताओं को पूरा करने के अलावा संस्थान में डीजल, पेट्रोल और मिट्टी के तेल से चलने वाले छोटे इंजनों, सिंचाई के पम्पों और पौधरक्षण यंत्रों की प्रमाणक, भिन्न योजनाओं के अन्तर्गत भारतीय मानक संस्थान द्वारा प्रमाणित जांच प्रयोगशाला भी स्थापित है।

 

हरियाणा अन्तरिक्ष अनुप्रयोग केन्द्र

हरसैक के नाम से प्रख्यात चैधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के प्रांगण में 26 फरवरी 1986 को स्थापित यह केन्द्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग हरियाणा की एक स्वायत संस्था है। इसका उद्देश्य अन्तरिक्ष तकनीक, भू-सूचना प्रणाली तथा ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम आदि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से राज्य के प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण तथा ढांचागत सुविधाओं के सर्वेक्षण तथा प्रबन्धन में सहायता करना है।

 

इण्डो आस्ट्रेलियन लाईव स्टाक फार्म

इसकी स्थापना सन् 1974-75 में आस्ट्रेलिया सरकार के सहयोग से की गई थी। यहां पर सैंकड़ो पशु प्रमुखतया जर्सी फेसियन और क्रास नस्ल के हैं। फार्म 500 एकड़ भूमि पर स्थित है तथा हिसार से 7 किलोमीटर की दूरी पर हिसार-बरवाला सड़क पर स्थित है।

 

इण्डो आस्ट्रेलियन भेड प्रजनन फार्म

इसकी स्थापना 1969-70 में आस्ट्रेलियन सरकार के सहयोग से की गई थी। यह फार्म लगभग 2000 हेक्टेयर भूमि पर विकसित है तथा हिसार से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

 

विज्ञान, प्राद्योगिकी, कृषि व चिकित्सा शिक्षा

हिसार शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यहां स्थापित तीन विश्वविद्यालय एवं एक मेडिकल काॅलेज प्रदेश व पड़ोसी राज्यों से आने वाले छात्र-छात्राओं को विज्ञान, व्यावसायिक एवं सामयिक शिक्षा की मांग को पूरा कर रहे हैं।

 

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना द्वारा हिसार में स्थापित कैम्पस वेटरनरी काॅलेज 2 फरवरी, 1970 को हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के रूप में अस्तित्व में आया जो वर्तमान में चै0 चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के रूप में विकसित हैं, जिसमें एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर, होम सांइस, बेसिक सांइस, स्पोट्र्स एवं एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग व कई अन्य कोर्स की शिक्षा दी जाती है। इस विश्वविद्यालय की संरचना में प्रथम कुलपति ए0एल0 फ्लेचर, आई0सी0एस0 (सेवानिवृत) का बहुत बड़ा योगदान रहा। यह विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा, शोध एवं उत्तम तरीके के बीज विकसित करने एवं उसके उत्पादन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कृषि के क्षेत्र में नित नए आविष्कार के कारण यह विश्वविद्यालय देश के खाद्यान्न भण्डार को समृद्ध बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

 

गुरू जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

गुरू जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार की स्थापना 20 अक्तुबर 1995 को की गई। इस विश्वविद्यालय में विज्ञान, प्रौद्योगिकी से संबंधितत स्नातक एवं स्नातकोतचर तथा शोध के विविध पाठ्यक्रम संचालित है। शैक्षणिक विकास के क्रम में इस विश्वविद्यालय का माॅनीटोबा वि0वि0, मेरीलैण्ड वि0वि0, जार्ज वाशिंगटन वि0वि0, टी.सी.जी. लाइफ सांइसेज, कोलकाता, बार्क, मुम्बई, आई.सी.आई. नई दिल्ली, एडिसिल नोएडा आदि के साम एम.ओ.यू. अनुबंध है। हाल ही में इस विश्वविद्यालय में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के प्रेक्षागृह का निर्माण किया गया है। देश के विश्वविद्यालयों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा इसे ए-ग्रेड प्रदान किया गया है तथा इसे हरित परिसर का भी सम्मान प्राप्त है।

 

लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय

लाल लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना 1 दिसम्बर 2010 को की गई। पशु चिकित्सा महाविद्यालय का साठ वर्षों का इतिहास गौरव पूर्ण रहा है। हिसार के चै0 चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से जुड़ा यह महाविद्यालय अब ‘पंजाब केसरी’ राष्ट्रभक्त लाला लाजपत राय की स्मृति में एक स्वतंत्र विश्वविद्यालय का रूप ले चुका है। शैक्षणिक सुविधाओं के अतिरिक्त/ पशुचिकित्सालय, प्रयोगशालाएं, शोध हेतु पशु शाला एवं बाड़ा उपलब्ध है। इस विश्वविद्यालय के नये परिसर का निर्माण 300 एकड़ भूमि खण्ड पर किया जा रहा है।

 

उद्योग व नगर विकास

कृषि, शिक्षा के क्षेत्र में विकास के साथ-साथ हिसार ने औद्योगिक एवं अन्य क्षेत्र के विकास में नये आयाम स्थापित किए। सन् 1947 से पहले हिसार में केवल एक बिनौला फैक्टरी थी। आजादी के बाद अनेक छोटे-बड़े उद्योग स्थापित हुए परन्तु वास्तविक विकास 1 नवम्बर 1966 को हरियाणा प्रांत बनने के बाद हुआ। जहां हरियाणा टेक्सटाईल मिल की स्थापना हुई वहीं जिंदल उद्योग ने हिसार को प्रसिद्धि दिलवाई। आयरन फरनिश, सरिया, बाल्टी आदि विभिन्न प्रकार के उद्योगों ने शहर के विकास में अहम् भूमिका निभाई तो जिंदल उद्योग को हिसार को उद्योग जगत में नाम दिलाने का श्रेय जाता है। विद्युत ऊर्जा आपूर्ति हेतु राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट खेदड़ स्थापित किया गया है। जो प्रगति के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहा है।

विगत कुछ वर्षों के अंतराल में ही शहर में बैंक्विेट हाल, बड़े-बड़े शोरूम, खूबसूरत पार्क आदि के निर्माण से हिसार के विकास को नयी दिशा मिली। हरियाणा विकास प्राधिकरण द्वारा जहां शहर में एक सुंदर टाऊन पार्क का निर्माण किया गया, वहां जिन्दल ग्रुप द्वारा दो ओ.पी. जिन्दल पार्क तथा ज्ञान केन्द्र स्थापित किया गया। इसके साथ ही सनसिटी माॅल, मिड टाउन ग्रैंड, मिलेनियम पैलेस, शीशमहल एवं हिसार बरवाला रोड़ पर साढे छह एक डमें बने स्पलैश फन पार्क, किड्स फन पूल, सलाइड, स्विमिंग पूल, फव्वारे व वातानूकूलित गेम्स का निर्माण शहर के विकास में चार चांद लगा रहे हैं।

हिसार आज देश के प्रमुख विकसित जिलों में गिना जाता है। हरियाणा राज्य के निर्माण के साथ हिसार का विकास तेज गति से हुआ है। हिसार जिला विभिन्न क्षेत्रों में हरियाणा में अग्रणी है।

जहां एक जहां एक ओर शहर में उद्योग, शिक्षा, व्यापार, कृषि एवं रिहायशी क्षेत्र का विकास तीव्र गति से हो रहा है, वहीं भारत सरकार द्वारा इसे काउंटर मैग्नेट सिटी का दर्जा मिला हुआ है। शहर के चतुर्दिक विकास की तीव्र गति को देखते हुए यह अनुमान है कि 2021 तक जहां शहर की आबादी तीन गुना बढ़कर लगभग दस लाख हो जाएगी, वहीं साढे तीन हजार हेक्टेयर में बसा यह शहर ढाई गुना फैलकर साढे़ आठ हजार हेक्टेयर से भी ज्यादा हो जाएगा। नगर के फैलाव में 21 नए सैक्टर और जुड़ जाएंगे। वर्तमान में नगर की अनुमानित जनसंख्या सवा तीन लाख है तथा पूरा शहर 680 हैक्टेयर में बसा हुआ है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, हाऊसिंग बोर्ड काॅलोनी, नगर सुधार मंडल व अन्य योजनाओं में अब तक इसका एक हजार हेक्टेयर से भी ज्यादा विस्तार हो चुका है। 2021 तक इसमें कई गुना बढ़ोतरी हो जायेगी।

हिसार के विकास प्रारूप में कई रिहायशी/औद्योगिक सेक्टर बनेंगे। परिवहन के क्षेत्र में 2021 तक नगर में नई सड़कों का निर्माण एवं विकास होगा। हर सड़क के दोनों तरफ चैड़ी हरी पट्टी बनेगी। पानी की बढ़ती जरूरत के अनुसार 2021 तक अनुमानित बढ़ती जनसंख्या केा देखते हुए अतिरिक्त जलघर बनेंगे। हिसार व आस-पास के लोगों के लिए विशेष जोन बनेगा। इस जोन को मनोरंजन के लिए विकसित किया जायेगा, जिसमें चिड़िया घर, झील, गोल्फ क्लब, तैराकी क्लब, टूरिस्ट काम्पलैक्स, संग्रहालय एवं पांच सितारा होटल भी शामिल हैं।